जहां चाह वहां राह पर निबंध हिन्दी मे- where there is a will there is a way

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Where there is a will there is a way

जहाँ चाह वहाँ राह पर कहानी लेखन

अगर आपके अंदर कुछ करने की इच्छा है तो राह अपने आप निकल आती है | दृढ संकल्प है तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता | आपके रस्ते से चट्टान को भी हटना होगा | और यही इच्छा शक्ति आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचने में मदद कराती है |

जहां चाह वहां राह पर लम्बा और छोटा निबंध

जहां चाह वहां राह पर यह हिंदी और अंग्रेजी की बहुत पुराणी कहावत है | इस विषय पर बच्चों को स्कूल में हमेश निबंध या पैराग्राफ लिखने को दिया जाता है | या फिर इस तरह के पैराग्राफ परीक्षा में अक्सर पूछे जाते है |

मैंने इस आलेख में लघु निबंध, निबंध तथा पैराग्राफ अलग अलग शब्दों में लिख रहा हूँ| आप अपने जरुरत के हिसाब से ले सकते है |

जहां चाह वहां राह पर निबंध 1 (100 शब्द)

जहां चाह वहां राह पर यह बहुत ही प्रचलित कहावत है | इसे आप मोटिवेशन के तौर पर ले सकते है | इस पंक्तिया का अर्थ होता है की अगर आपमें कुछ करने की लगन हो तो आप जरूर सफल हो सकते है |

अगर आपका विज़न क्लियर है और आपमें दृढ़ शक्ति है तो सफलता आपके कदम चूमेगी | आप 101 परसेंट सक्सेस हो जायेंगे | लेकिन अगर आलसी है आपके अन्दर कुछ करने की हिम्मत नहीं है तो आप कही भी सफल नहीं हो सकते है | इस पैराग्राफ से हमें सिख मिलती है की हमें अपने लक्ष्य की और लगातार मेहनत करनी चाहिए |




इस पैराग्राफ से हमें सिख मिलती है की हमें अपने लक्ष्य की और लगातार मेहनत करनी चाहिए |
अगर कुछ करने के लिए आपने तन मन और धन से स्वीकार कर लेते है तो आपकी पांचों इन्द्रियां स्वत: काम करने लग जाती है । इसलिए विद्वानों ने ठीक ही कहा है- आप तभी सफ़ल हो जाते हो जब निश्चय कर लेते हो ।

जहाँ चाह वहां राह पर छोटी कहानी

जहां चाह वहां राह पर निबंध 2 (250 शब्द)

जहां चाह वहां राह यह पंक्तियां आपके अन्दर उर्जा का संचार पैदा कर देगी । हमारे भारत देश जिन-जिन लोगों ने अपने सफ़लता के परचम फ़हराया है, उसने भी एक दिन परेशान होकर अपने मन ही मन कहां है- yes we will do it.

लेकिन आपको एक चीज बता देता हुं ये आवाज आपके अन्दर से तभी आती है, जब आपको कोई बहुत अधिक दुखी कर रहा होगा या फ़िर कोई भी वस्तु आपको बहुत तकलीफ़ दे रहा होगा । उससे निजात पाने के लिए आपने ये प्रण लिया होगा- हां हमे ये करना है । हमे इस बोस का मुंह नही देखना है ।
जहां चाह वहां राह का सीधा अर्थ है- अगर आप किसी वस्तु को पाने की इच्छाअ रखते है तो उसके लिए आपको कठिन मेहनत करना होगा । आपको सबसे लड जाना पडेगा । आपको अपने सपनों के प्रति पागल हो जाना पडेगा । जब आपके पडोसी आपके मुहल्ले वाले आपको पागल बोलने लगे
तो समझ लेना सफ़लता शीघ्र ही आपके कदम चुमने वाली है ।

हमे अपने सपनों से कभी समझौता नही करना है । हमे अपने सपने को अपने नजर के सामने ही रखना है, कोई इसे चुरा न ले । कोई आपके सपनों को चुरा न ले ।

जिस जिस ने ये ठान लिया है, वे सफ़ल होकर ही रहा । आप उदाहरण के लिए अमेरिका के भुतपुर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को देख लिजिए। उसने 15 बार चुनाव हार चुके थे, व्यापार मे दिवालिया हो गये थे । लेकिन उसने फ़िर भी हार नही मानी और एक दिन वो अमेरिका का राष्ट्रपति बन गया । किसी कवि ने ये पंक्तियां क्या खुब कही है-

मंजिलें उन्ही को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है
मंजिलें उन्ही को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है
पंखो से कुछ नहीं होता हौसलों से उडान होती है

जहां चाह वहां राह पर निबंध 3 (400 शब्द)

 

ये बात को सभी जानते है कि जहाँ चाह है वहां राह है, लेकिन कोई नहीं करता क्योकि इसमें बहुत मेहनत करनी पड़ती है |

इस दुनिया में असंभव नाम का कोई भी शब्द नहीं है | कहने का तात्पर्य यह है कि इस धरती पर कुछ भी असंभव नहीं है | केवल आपके अंदर इच्छा शक्ति और दृढ-संकल्प होना चाहिए | अगर हमारे इरादे मजबूत हो चट्टान कि तरह तो हमें कोई भी हरा नहीं सकता | हमारे मजबूत इरादे आगे बढ़ने के लिए ताकत देती है , जबतक हम अपना लक्ष्य पा नहीं लें |



 

अगर हम किसी चीज को पाना चाहते है या कुछ बनना चाहते है, जो आजतक किसी ने नही किया हो

तो आपको तन मन और धन से लग जाना होगा । कोई भी परेशानी आएगी उससे आपको लडना होगा तभी आप जो चाहते है, वो हासिल कर पांएगे।

कुछ लोग दुसरे के सफ़लता को देखकर वो भी लग जाते है, लेकिन वे ज्यादा दिन तक टिक नही पाते है, क्योकिं उसके अन्दर इच्छा शक्ति का अभाव होता है ।

दृढ़ इच्छाशक्ति होने के बावजूद, अनुशासन, निरंतरता, समर्पण और धैर्य जैसी अन्य चीजों की भी परम आवश्यकता होती है। हमें कड़ी मेहनत करनी होगी, सुबह जल्दी उठना होगा, और पूरी प्रतिबद्धता के साथ निश्चित घंटों से अधिक समय तक काम करना होगा। हमें केवल चीजों को स्थगित किए बिना और परिणाम की प्रतीक्षा किए बिना लगातार काम करने की आवश्यकता है। अपनी मेहनत का बहाना मत बनाओ और अपने भाग्य से कभी शिकायत मत करो। और किसी भी पर इल्जाम मत लगावो । जो दुसरे पर इल्जाम लगाते है वो बुजदिल होते है ।

हमे बहुत बार असफ़लता भी हांथ लगती है, उसे भी साकारात्मक लेना होगा , तभी हमारे इरादे बुलंद होगे ।

जहां चाह वहां राह पर कहानी

 

कभी कभी कोई आदमी अपना सबकुछ लुटाकर भी कुछ हासिल नही कर पाता है। ऎसी स्थिति मे हर एक बिन्दुऒं को अच्छी से चेक करना होगा, शायद किसी जगह पर आप बलंडर मिस्टेक कर रहे होगें।

आप जब कोई अच्छा काम करने जाएंगे तो आपके रास्ते मे कई अडचने आएगी :-

 

हाथी चले बाजार तो कुता भुके हजार

 

मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती है, स्वप्न के परदे निगाहों से हटती है

हौसला मत हार गिर कर ऐ मुसाफिर, ठोकरें इंसान को चलना सिखाती है

 

 

जहाँ हर सर झुक जाए वही मंदिर है, जहाँ हर नदी मिल जाये वही समंदर है

ज़िन्दगी हर मोड़ पर एक युद्ध है जो हर युद्ध जीत जाये वही सिकंदर है

ईश्वर का दिया कभी ‘अल्प’ नहीं होता,जो टूट जाये वो ‘संकल्प’ नहीं होता,हार को लक्ष्य से दूर ही रखना,क्यूंकि जीत का कोई ‘विकल्प’ नहीं होता….

 

आप पहले बार मे ही आपको सफ़लता हांथ नही लगती। कई बार ऎसा होता है कि सफ़लता के लिए आपको १० बार असफ़ल होना पडेगा, तब आप ११ बार में सफ़ल हो पाएंगे । ये पंक्ति आपको हमेशा याद रखनी है:-

Failure is the pillars of Success

 




हमे भी यह ध्यान रखना होगा कि जिन चीजों को पाना बहुत कठिन है, उसके लिए हमें बहुत और लगातार मेहनत करनी होगी । मनुष्य के अन्दर बहुत ताकत होता है, वो जो चाहे वो कर सकता है । केवल आपकी अन्दर सोए हुए आंतरिक इच्छा शक्ति, दृढ़ संकल्प, समर्पण और कड़ी मेहनत की क्षमता को जगाना है ।

में अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की जरूरत है और रास्ते की सभी कठिनाइयों को पार करके लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हमारे भीतर ऐसी प्राकृतिक शक्तियों का विकास करना है। हमें परम जीत पाने के लिए अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है क्योंकि जहां इच्छा है, वहां एक रास्ता है।

जहां चाह वहा राह पार आधारित प्यासा कौआ और घडा की कहानी

एक समय की बात है एक प्यासा कौआ पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। तेज गर्मी और निरंतर उड़ते रहने से उसकी प्यास और भी बढ़ने लगी थी । वह सोचने लगा-“अगर मुझे जल्दी ही पानी नही मिला तो मेरी मौत निश्चित है।” वह यह सोच ही रहा था कि तभी उसे दूर पानी का एक घड़ा नजर आया।

वह उडकर तुरंत वहाँ पहुँचा और घड़े में अन्दर झाँकने लगा। परन्तु उसमें पानी तो था, लेकिन पानी इतना नीचे था कि वहाँ तक उसकी चोंच नही पहुँच सकती थी।प्यासा कौआ यह देखकर वह परेशान हो गया। उसने इधर-उधर देखना शुरू किया। शायद किसी अन्य बर्तन में पानी दिख जाए, या शायद कोई और घड़ा ही मिल जाए। लेकिन ऐसा उसे कुछ नजर नही आया।

वह निराश होकर वहाँ से जाना ही चाहता था कि तभी उसकी नजर घड़े से कुछ ही दूर पर मकान बनाने के लिए पड़ें हुए कंकड़-पत्थरों पर गई। पत्थरों को देखते ही उसके दिमाग में एक विचार कौंधा। वह कंकडों के पास गया और अपनी चोंच में कंकड़ ला-लाकर घड़े में डालता गया।कुछ ही देर में उसकी मेहनत रंग लाई और घड़े के पानी का स्तर ऊपर तक पहुँच गया। अब कौआ बहुत सरलतापूर्वक पानी पी सकता था। उसने घड़े में अपनी चोंच डाली और जी भरकर पानी पिया। और अपनी प्यास मिटाई । और अब वह खुद को तारोताजा महसूस करने लगा। कुछ देर उसने वहीं आराम किया और फिर भोजन की तलाश में वहाँ से अन्यत्र उड़ गया।

इससे हमें यह सिख मिलती है, कि हम जो चाहे कर सकते है। केवल हमें साकारात्मक सोचने की जरुरत है ।

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