Makar Sankranti Festival in Hindi-मकर संक्रांति त्योहार पर निबंध

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Makar Sankranti Festival in Hindi-मकर संक्रांति त्योहार पर निबंध

Short Essay on Makar Sankranti in Hindi 100 Words

हम भारत देश में रहते है । हमारा देश भारत देश त्योहारों का देश है । यहां समय-समय पर अलग-अलग त्योहार आकर हमारे नीरस जिदंगी में आशा का संचार करता है । आज मकर-सक्रांति (Makar Sankranti ) का त्योहार है । यह त्योहार पुरे भारतबर्ष में मनाया जाता है , चाहे कोई भी राज्य हो या वेश-भुषा सभी लोग इसे मनाते है । केवल भाषा और रहन सहन में फ़र्क होता है । इसलिए तो कवि कहते है:-

हिंद देश के वासी सारे जन एक है, रंग-रुप, वेश-भुषा चाहे अनेक है

बेला, गुलाब, जुही, चम्पा, चमेली सारे फ़ुल मिल मिल जाएं माला में एक है ।

Makar Sankranti Essay in Hindi 150 Words

 

मकर-सक्रांति का त्योहार को किसानी त्योहार भी कहते है,क्योकिं फ़सल समेटने के बाद इसे मनाया जाता है । यह त्योहार हर साल बहुत प्यार और सौहाद्र से मनाया जाता है । हमारे देश को त्योहारों का देश कहा जाता है । इस त्योहार को हर साल 14 या 15 जनवरी को बहुत ही धुमधाम से मनाया जाता है ।

इस त्योहार को भारत के सभी राज्यों मे मनाया जाता है लेकिन उनके अलग-अलग नामों से पुकारते है । सक्रांति मनाने के पीछे यह धारणा है कि इस दिन सुर्य भगवान धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करता है । और इस तिथि मे कई शुभ कार्य किए जाते है यानी सक्रांति के बाद तिथि शुभ मानी जाती है ।

इस दिन सुबह सुबह सभी स्नान करने के बाद तिल के लडडु खाते है | और दिन-भर बच्चें पतंग उडाते है और मजा करते है ।

कुछ लोग गंगा-यमुना तथा सरस्वती नदी के संगम पर जाकर स्नान करते है और पुण्य के भागी बनते है । सुर्य भगवान को पुजा करने से बहुत फ़ायदे होते है । सभी बहुत ही हर्षोल्लस से मनाते है ।

Makar Sankranti in Hindi 600 words

 मकर-सक्रांति हिन्दुऒं का प्रमुख त्योहार है । गांवों में किसान इसे बहुत ही हर्ष से इसे मनाते है । इसे माघी त्योहार भी कह सकते है । यह त्योहार भारत के अलावा नेपाल तथा मारिशस आदि देशों में भी मनाया जाता है । इस त्योहार को सभी बहुत ही हर्ष और उल्लास से मनाते है । बच्चें दिन भर पतंग बाजी करते है । इस दिन चुडा दही खाने का भी रिवाज है । स्त्रियां तिल से बने तरह तरह से पकवान बनाते है ।

मकर सक्रांति क्या है

ग्र्हों और राशियों सुर्य और चन्द्र पर निर्भर होता है ।जब सुर्य भगवान धनु राशि से चलकर मकर राशि में प्रवेश करते है तभी मकर सक्रांति आता है । यह त्योहार हर साल १४ जनवरी को मनाया जाता है। लेकिन कभी-कभी यह जब सुर्य को एक राशि से दुसरे राशि में आने में समय लग जाता है। जिसके वजह से कभी एक दिन आगे और एक दिन पीछे भी हो जाता है ।

तमिल लोग इसे पोंगल के नाम से जानते है ।तथा केरल और कर्नाटक के लोग इसे केवल सक्रांति कहते है और गुजरात में इसे उतरायण के नाम से जानते है । उतर प्रदेश में इसे खिचडी के नाम से जानते है क्योकि वे सुर्य भगवान को चढाते है ।

इस दिन सभी तिल के बने लड्डु, गजक तथा मुंगफ़ली आदि खाते है तथा एक-दुसरे को खिलाते है । और बच्चें अपने घर के छत पर जाकर पतंग उडाते है । मतलब अलग अलग राज्यों में अलग-अलग संस्कृति और विचारधारा देखने को मिलती है । पतंग उडाने की परंपरा हमेशा होती है ।

हिन्दू-धर्म के अनुसार मकर सक्रांति के बाद सारे शुभ काम कर सकते है । सक्रांति के बाद शुभ चौघडिया आती है । इस त्योहार को सभी मिल-जुल कर बहुत ही धुम धाम से मनाते है ।

मकर संक्रान्ति का महत्व (Importance of Makar Sakranti)

मकर संक्रान्ति को Harvesting Festival भी कहते है तथा इसे पंजाब में लोहरी के नाम से मनाया जाता है । मकर संक्रान्ति धार्मिक तथा ऎतिहासिक दोनो कारणों से बहुत महत्वपुर्ण है ।

धार्मिक महत्व :- मकर संक्रांति के पुर्व भगवान सुर्य धनु राशि में होता है और उसके बाद सुर्य भगवान मकर राशि में होता है । धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मकर राशि को साकारात्मक माना गया है । इस तिथि में दिया गया दान, जप तप और बलिदान वापस आपको १०० गुना बढकर मिलता है ।

ऎसा भी मानना है कि सुर्य भगवान मकर राशि पर अपने पुत्र शनिदेव से मिलने गये थे । क्योकिं शनि मकर
राशि के स्वामी है । इसलिए मकर-सक्रांति मनाया जाता है ।

मकर राशि पर गंगा में डुबकी लगाने से सभी पाप धुल जाते है । और ऎसा भी मानना है कि पवित्र नदियों के स्नान से बहुत बडा पुण्य मिलती है ।इसलिए इस अवसर पर प्रयागराज (इलाहाबाद) में गंगा यमुना तथा सरस्वती के संगम के पवित्र तट पर लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान करके पुण्य अर्जित करते है । यहां एक महीना तक मेला लगा रहता है ।

ऎतिहासिक महत्व : एक अन्य कथा के अनुसार जब महाभारत-युद्ध मे भीष्म पितामह वाणों की शैया पर पडे-पडे युध्द देखा और अंत में उसने इच्छा-मृत्यु मांगा तब वह दिन मकर-सक्रांति का ही दिन था ।
एक अन्य मान्यता है कि जब राजा भगीरथी ने अपने पुर्वजों के कल्याण के लिए गंगा को धरती पर लाया और इसी दिन भगीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में मिल गई ।

सामाजिक महत्व:- यह त्योहार से घर में सुख सम्पदा और पुण्य मिलता है । किसान की स्तियां अन्नाज से तरह तरह के पकवान बनाती है जैसे- तिल का लड्डु, गजक, तिलकुट आदि । सक्रांति के बाद खिचडी खाने का भी रिवाज है ।

उपसंहार :- हमारा देश भारत एक विशाल देश है । यहां सभी लोग अपने काम के लिए सुबह से शाम तक भाग-दौड करते रहते है , जिससे वे अपने रिश्ते और अपने परिवार से दुर होते जाते है । लेकिन पर्व त्योहार एक ऎसा अवसर होता है जब वे सभी से मिल पाते है । और खुशीपुर्वक आनंद लेते है ।

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